पटना: बिहार के सरकारी अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए खरीदे गए डस्टबिन और बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमतों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। खरीद में कथित अनियमितता को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने कौशलेश कुमार की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए की गई डस्टबिन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद की कीमतों पर सवाल उठाए गए हैं।
बाजार से कई गुना अधिक कीमत पर खरीद का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया कि सरकारी अस्पतालों के लिए 75 लीटर और 45 लीटर क्षमता वाले माइक्रोवेव डस्टबिन की खरीद की गई। आरोप है कि 75 लीटर के एक डस्टबिन की कीमत करीब 15,490 रुपये, जबकि 45 लीटर वाले डस्टबिन की कीमत 11,474 रुपये निर्धारित की गई।
याचिका में दावा किया गया है कि बाजार में इसी तरह के डस्टबिन की कीमत काफी कम है। 75 लीटर के डस्टबिन की बाजार कीमत करीब 1,550 रुपये और 45 लीटर वाले की कीमत लगभग 1,162 रुपये बताई गई है।
बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमत पर भी सवाल
मामला सिर्फ डस्टबिन तक सीमित नहीं है। याचिका में इनके साथ इस्तेमाल होने वाले बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप के मुताबिक 75 लीटर क्षमता वाले बैग को 98 रुपये और 45 लीटर वाले बैग को 69 रुपये की दर से खरीदा गया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि बाजार में इन बैग की कीमत क्रमश: करीब 8.50 रुपये और 5.75 रुपये के आसपास है। हालांकि, इन कीमतों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि अभी कोर्ट या राज्य सरकार की ओर से नहीं हुई है।
57 ऑर्डर के जरिए करीब 307 करोड़ की खरीद का दावा
जनहित याचिका के मुताबिक जून 2024 से 18 अप्रैल 2026 के बीच इन सामानों की खरीद के लिए कुल 57 आदेश जारी किए गए। याचिका में चारों वस्तुओं की कुल खरीद राशि 18 फीसदी जीएसटी समेत करीब 307 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि निविदा प्रक्रिया में सात कंपनियों ने हिस्सा लिया था और बाद में लखनऊ की एसएस मेडिकल सिस्टम को टेंडर दिया गया।
29 करोड़ बनाम 307 करोड़ का दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन चार वस्तुओं की खरीद की गई, उनकी बाजार दरों के आधार पर कुल कीमत करीब 29 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है, जबकि सरकारी खरीद में इसकी राशि करीब 307 करोड़ रुपये बताई गई है। इसी अंतर को आधार बनाकर खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितता और सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी दावे फिलहाल जनहित याचिका में लगाए गए आरोप हैं। मामले की वास्तविक स्थिति राज्य सरकार के जवाब और कोर्ट में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के बाद ही स्पष्ट होगी।
3 नवंबर तक सरकार को देना है जवाब
पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 3 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।
ऐसे में अब सबकी नजर राज्य सरकार के जवाब पर है। सरकार खरीद की प्रक्रिया, टेंडर, दरों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डस्टबिन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद में वास्तव में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।
