पटना: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे रविवार, 25 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना पहुंचे। यहां बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने शिरकत की। इस कार्यक्रम में खरगे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उनके भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक व्यक्ति की टिप्पणी के बाद विवाद भी हो गया।

खरगे ने अपने संबोधन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा उठाया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए भविष्य में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की। साथ ही, उन्होंने पिछले दो वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग भी उठाई। उनके इन बयानों ने बिहार के राजनीतिक माहौल में नई बहस छेड़ दी।

SIR को लेकर क्या बोले मल्लिकार्जुन खरगे?

कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। खरगे ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।

खरगे ने SIR के खिलाफ चल रहे विरोध को ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ की संज्ञा दी। उन्होंने लोगों से अपने मतदान के अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावों में मतपत्रों का इस्तेमाल दोबारा शुरू किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत हो सके। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी और विपक्षी समर्थकों के नाम हटाए जाने से जुड़े आरोप खरगे के राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

काले धन का भी उठाया मुद्दा

अपने भाषण में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने काले धन को वापस लाने के वादे का जिक्र करते हुए सवाल किया कि विदेशों में जमा कथित काला धन वापस लाने की बात का क्या हुआ।

खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने शुरुआती 100 दिनों में काला धन वापस लाने का वादा किया था, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और उसके वादों को लेकर सवाल उठाए।

खरगे के इस बयान का उद्देश्य केंद्र सरकार को उसके पुराने वादों पर घेरना था। हालांकि, काले धन की वापसी को लेकर सरकार की विभिन्न कार्रवाइयों और उनके परिणामों का आकलन अलग-अलग आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

RSS की विचारधारा पर भी तीखा हमला

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और RSS की राजनीति समाज में विभाजन को बढ़ावा देती है। खरगे ने कहा कि जब तक देश में RSS की विचारधारा का प्रभाव बना रहेगा, तब तक शांति स्थापित करना मुश्किल होगा। उन्होंने सामाजिक सद्भाव, समानता और संविधान के मूल्यों की रक्षा करने की बात कही।

उन्होंने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के विचारों और बिहार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सांप्रदायिक तनाव और भेदभाव की जगह लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व दिया जाना चाहिए। खरगे ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि धर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ है। उन्होंने दलितों के मंदिरों में प्रवेश और पूजा करने के समान अधिकार की भी वकालत की।

नीतीश कुमार पर भी टिप्पणी

बिहार की राजनीति का जिक्र करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बीजेपी के साथ राजनीतिक साझेदारी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने नीतीश कुमार के पुराने समाजवादी राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए उनकी मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए।

खरगे ने राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नीतीश कुमार का बीजेपी के साथ गठबंधन उनके पुराने राजनीतिक जुड़ाव से अलग दिखाई देता है। उनकी इस टिप्पणी को बिहार में कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

भाषण के दौरान हंगामा

कार्यक्रम के दौरान उस समय स्थिति विवादित हो गई, जब श्रोताओं में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, व्यक्ति की टिप्पणी के जवाब में खरगे ने कहा, ”मोदी का बाप भी जाएगा।”

इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर हंगामे की स्थिति बन गई। खरगे की टिप्पणी को लेकर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अनुचित भाषा बताया। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने खरगे का बचाव किया। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।

अमित शाह ने की आलोचना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खरगे की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध में भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया।

बीजेपी नेताओं ने भी इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस घटना को राजनीतिक विवाद का रूप दिया जा रहा है। इस तरह, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ऐतिहासिक व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ SIR, चुनाव सुधार, बीजेपी-RSS की विचारधारा और प्रधानमंत्री को लेकर की गई टिप्पणी प्रमुख चर्चा के विषय बन गए।

कौन थे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह?

डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें बिहार में ‘श्री बाबू’ और ‘बिहार केसरी’ के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे। स्वतंत्रता के बाद बिहार के प्रशासनिक और संस्थागत विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल को राज्य में शिक्षा, कृषि, सिंचाई, उद्योग और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे के विकास से जोड़कर देखा जाता है। उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में खरगे ने उनके योगदान को याद किया और सामाजिक समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संविधान की रक्षा पर जोर दिया।

पटना में हुए इस कार्यक्रम के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। खासकर SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर खरगे की मांगों तथा प्रधानमंत्री पर उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *