पटना: बिहार में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष ने गुरुवार को सड़क पर जोरदार आंदोलन किया. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने पटना में लोकभवन की ओर मार्च निकाला। इस दौरान आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों के नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं राज्य के जिला मुख्यालयों पर भी विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया।
महागठबंधन की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना, SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग की।
सुबह से ही पटना में जुटने लगे थे कार्यकर्ता
राजभवन मार्च को लेकर पटना में सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। विधानसभा गोलंबर और आसपास के इलाकों में महागठबंधन के नेता और कार्यकर्ता जुटने लगे। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं से पुलिस की झपड़ भी हुई.
तेजस्वी यादव के साथ वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और वाम दलों के नेता भी मार्च में शामिल हुए। महागठबंधन नेताओं ने SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राजभवन की ओर बढ़ने की कोशिश की।
बैरिकेडिंग पर चढ़े तेजस्वी यादव
मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। इसी दौरान तेजस्वी यादव बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद रहे। इसके बाद मौके पर काफी देर तक नारेबाजी और धक्का-मुक्की का माहौल बना।
महागठबंधन नेताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प की भी खबर सामने आई। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और मीसा भारती समेत कई नेताओं को पुलिस वाहन से ले गई। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष अलग है। पटना पुलिस ने तेजस्वी यादव को हिरासत में लिए जाने से इनकार किया है।

सिर्फ 300 मीटर बाद रुक गया मार्च
महागठबंधन का मार्च राजभवन तक पहुंचने वाला था, लेकिन पुलिस बैरिकेडिंग के कारण मार्च आगे नहीं बढ़ सका। रिपोर्ट के मुताबिक विधानसभा गोलंबर से आगे करीब 300 मीटर की दूरी पर ही मार्च रोक दिया गया और प्रदर्शनकारी वहीं रुक गए। इसके बाद महागठबंधन के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचा।
राज्यपाल से मिले महागठबंधन के नेता
प्रदर्शन के बाद तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के कई नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी विपक्ष की आपत्तियों को रखा गया। आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के मुताबिक महागठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग प्रमुखता से रखी।
विपक्ष की ओर से चुनाव में बैलेट पेपर व्यवस्था बहाल करने और SIR के आधार पर हुए चुनावों को लेकर भी सवाल उठाए गए। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि महागठबंधन की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी उठाई।
वहीं राजभवन में उस वक्त सियासी माहौल और गरमा गया, जब बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी राज्यपाल से मुलाकात के लिए लोकभवन पहुंचे। इसी दौरान वहां मौजूद आरजेडी कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाने लगे। उस वक्त तेजस्वी यादव भी राज्यपाल को ज्ञापन सौंप रहे थे,
उसी दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। भीड़ और नारेबाजी के बीच सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह संजय सरावगी की गाड़ी को प्रदर्शनकारियों के बीच से बाहर निकाला। घटना के बाद राजभवन परिसर के बाहर कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला।
लोकतंत्र की हत्या हो रही है-सुनील सिंह
प्रदर्शन के दौरान आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या हो रही है और इसी के खिलाफ महागठबंधन आंदोलन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाताओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।
वहीं आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने भी पुलिस की बैरिकेडिंग को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी को रोक नहीं पाएगी और विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल- तेजस्वी
प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों को बराबर मौका मिलना चाहिए।
महागठबंधन लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष ने SIR को लेकर अपनी आपत्तियों को राजनीतिक आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बना दिया है।
बुधवार के बाद गुरुवार को भी सड़क पर विपक्ष
महागठबंधन ने अपने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया है। 7 अक्टूबर को बिहार के सभी 534 प्रखंड मुख्यालयों पर आक्रोश मार्च और पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बाद 8 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और पटना में राजभवन मार्च का कार्यक्रम रखा गया।
इस तरह गुरुवार को पटना में कुछ ही समय के भीतर मार्च समाप्त हो गया, लेकिन इसके साथ बिहार की सियासत में SIR और चुनाव आयोग को लेकर टकराव और तेज हो गया है। महागठबंधन ने साफ संकेत दिया है कि उसकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
