महाराष्ट्र : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं। 8 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के पुणे स्थित उनके गांव डोंजे में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने उन्हें अंतिम विदाई दी। अपने पसंदीदा अभिनेता को आखिरी बार देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचे।
नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन के लिए फिल्म जगत के कई सितारे और बड़ी राजनीतिक हस्तियां भी पहुंचीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत कई प्रमुख लोगों ने दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि दी।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पार्थिव शरीर को ताल-मृदुंग बजाते हुए अंतिम संस्कार स्थल तक लाया गया। इसके बाद उन्हें तीन गन सैल्यूट देकर राजकीय सम्मान दिया गया।
अंतिम संस्कार स्थल पर नाना पाटेकर के प्रशंसकों की भारी भीड़ मौजूद रही। बड़ी संख्या में लोग अपने चहेते अभिनेता की आखिरी झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते दिखाई दिए। माहौल बेहद भावुक था और हर तरफ नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ नजर आई।
बेटे मल्हार ने दी आखिरी विदाई
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के दौरान उनके बेटे मल्हार भावुक नजर आए। उन्होंने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। परिवार, करीबी दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मौजूदगी में अभिनेता की अंतिम यात्रा पूरी हुई।
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद से ही उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में शोक की लहर है। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने अपने अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में खास मुकाम बनाया।
45 मिनट तक चला सीपीआर, फिर भी नहीं बची जान
रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर की तबीयत 8 अक्टूबर की रात करीब 2:30 बजे बिगड़नी शुरू हुई थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही थी। बताया गया कि उन्होंने देर रात अपने एक दोस्त को फोन करने की कोशिश भी की थी, लेकिन बात नहीं हो सकी।
सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें कमरे में बेसुध पाया गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उनकी जान बचाने की कोशिश की। तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
बताया गया कि अभिनेता का निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ।
1978 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने साल 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। मुजफ्फर अली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में फारूक शेख और स्मिता पाटिल भी प्रमुख भूमिकाओं में थे।
शुरुआत में छोटे और सहायक किरदार निभाने वाले नाना पाटेकर ने धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना ली। उनकी खास आवाज, संवाद अदायगी और गंभीर अभिनय शैली दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई।
‘परिंदा’ से ‘नटसम्राट’ तक यादगार सफर
नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में कई शानदार फिल्मों में काम किया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘वजूद’, ‘यशवंत’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खास तौर पर याद किया जाता है।
गंभीर भूमिकाओं के साथ-साथ उन्होंने कॉमेडी में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। फिल्म ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। वहीं मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में उन्होंने एक बुजुर्ग रंगमंच अभिनेता की भूमिका निभाकर एक बार फिर साबित किया कि अभिनय के मामले में उनकी पकड़ कितनी मजबूत थी।
तीन बार जीता राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
नाना पाटेकर का नाम भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में लिया जाता है जिन्होंने अभिनय के लिए कई बड़े सम्मान हासिल किए। उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2013 में उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया था।
नाना पाटेकर को आखिरी बार ‘ओ रोमियो’ में देखा गया था। उनकी आने वाली फिल्मों में ‘शक्ति शालिनी’ का नाम भी शामिल है। करीब पांच दशक लंबे सफर के बाद नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। पर्दे पर उनके निभाए किरदार, दमदार आवाज और अभिनय की अपनी खास शैली के कारण वह लंबे समय तक दर्शकों की यादों में जीवित रहेंगे।
