लंदन: कर्बला की सरज़मीं से निकला इमाम हुसैन का पैगाम आज करीब 1400 साल बाद भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को जोड़ रहा है। इसकी एक तस्वीर रविवार को लंदन के मशहूर मार्बल आर्च में देखने को मिली, जहां अरबाईन के मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने जुलूस में शामिल होकर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। अरबाईन यूके के मुताबिक 9 अगस्त 2026 को मार्बल आर्च पर 46वां अरबाईन प्रोसेशन आयोजित किया गया।
लंदन के मार्बल आर्च में निकला यह जुलूस दुनिया भर से आए लोगों की भागीदारी से बेहद खास बन जाता है। यह जुलूस कई किलोमीटर तक फैला हुआ था और इसमें कई भाषाओं में नौहे पढ़े गए. हालांकि, इस जुलूस में उर्दू भाषी समुदाय के लोग काफी सक्रिय नजर आए. ‘या हुसैन’ की सदाएं बुलंद हुईं। हाथों में अलम और मातमी निशान लिए लोग कर्बला के पैगाम को याद करते नजर आए।

सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम
जुलूस में महिलाओं की भी भागीदारी रही। इसी दौरान एक महिला ज़ाकिर तकरीर करती हुई नजर आईं और उन्होंने कर्बला की कुर्बानी तथा इमाम हुसैन के संदेश को लोगों तक पहुंचाया। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम दिखाई दिए। जगह-जगह सुरक्षा गार्ड तैनात रहे, जबकि वॉलंटियर्स लोगों की खिदमत में जुटे रहे। पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं के जरिए लोगों की सेवा की गई।

बढ़ती जा रही है कर्बला की याद
लंदन का यह जुलूस सिर्फ एक धार्मिक आयोजन की तस्वीर नहीं था, बल्कि यह एक सवाल भी था कि आखिर 1400 साल बाद भी इमाम हुसैन की कुर्बानी दुनिया के लोगों के दिलों में आज भी इतनी जिंदा क्यों है? कर्बला का पैगाम किसी एक शहर या एक देश तक सीमित नहीं रहा। आज अरबाईन के मौके पर इराक के करबला में लाखों-करोड़ों लोग पहुंचते हैं, जबकि दुनिया के दूसरे देशों में भी जुलूस और मजलिसें आयोजित होती हैं। 2026 के अरबाईन में करबला में करीब 1 करोड़ 99 लाख 99 हजार 870 ज़ायरीन की भागीदारी की जानकारी सामने आई है।
लंदन जैसे पश्चिमी शहर में मार्बल आर्च पर हजारों लोगों का इकट्ठा होना इसी बात की तरफ इशारा करता है कि हुसैन की याद सरहदों की मोहताज नहीं है। कर्बला की कहानी आज भी लोगों को जुल्म के सामने डटकर खड़े होने, इंसाफ, सच्चाई, सब्र और कुर्बानी का संदेश देती है। शायद यही वजह है कि हर साल अरबाईन के मौके पर दुनिया के अलग-अलग देशों से लोग इमाम हुसैन की याद में निकलते हैं और ‘लैब्बैक या हुसैन’ की सदाएं बुलंद करते हैं।

क्यों मनाया जाता है अरबाईन?
इमाम हुसैन इब्ने अली, पैगंबर हजरत मुहम्मद के नवासे और शिया इस्लाम के तीसरे इमाम थे। 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में उन्होंने यज़ीद की बैअत स्वीकार करने से इनकार किया और अपने साथियों व परिवार के साथ 10 मोहरर्म को शहादत पेश की। मोहरर्म के आशूरा के 40वें दिन चेहल्लुम यानी अरबाईन होता है, जो कई दिनों तक चलता है. अरबाईन इमाम हुसैन की शहादत की याद और उनके बताए इंसाफ, सच्चाई तथा जुल्म के खिलाफ खड़े होने के संदेश को दोहराने का अवसर है।
