Kanwar Yatra 2026: सावन आते ही हर तरफ ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंजने लगते हैं, लेकिन इस बार दो कांवड़ यात्राएं ऐसी हैं, जिन्होंने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ मेरठ के आकाश सैनी 301 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं, तो दूसरी तरफ बिहार के बेगूसराय के अमित कुमार आंखों पर पट्टी बांधकर करीब 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा कर रहे हैं। दोनों की भक्ति और संकल्प को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है।

इतनी भारी कांवड़ कि देखने वालों की नजरें थम गईं

मेरठ के वलीदपुर गांव के रहने वाले आकाश सैनी इस बार ऐसी कांवड़ लेकर निकले हैं, जिसने पूरे रास्ते लोगों का ध्यान खींच लिया है। आकाश करीब 301 लीटर पवित्र जल लेकर हरिद्वार से बाबा धाम देवघर जाएंगे। उनकी विशाल कांवड़ जहां से गुजरती है, वहां श्रद्धालु रुककर उसे देखने लगते हैं। कई जगह लोगों ने उनका स्वागत किया और उनकी यात्रा के प्रति सम्मान जताया।

सीएम योगी की मन्नत लेकर निकले आकाश, हुआ खास सम्मान

आकाश सैनी ने योगी आदित्यनाथ के तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की मन्नत लेकर यह कांवड़ उठाई है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर वह मेरठ के औघड़नाथ मंदिर पहुंचेंगे और वहां भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। मुजफ्फरनगर के शिव चौक पहुंचने पर आकाश का सैनी समाज की ओर से विशेष स्वागत किया गया। इस दौरान सम्मान के तौर पर उन्हें एक बाइक भी भेंट की गई। आकाश की इस यात्रा में करीब 10 भोले भक्तों की टीम भी सहयोग कर रही है, जो यात्रा के दौरान उनकी मदद कर रही है।

आकाश सैनी का लक्ष्य करीब 10 अगस्त तक मेरठ के औघड़नाथ मंदिर पहुंचना है। यहां पहुंचकर वह भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उनकी कांवड़ की विशालता और उसमें लाए जा रहे जल की मात्रा ने इसे इस साल की चर्चित कांवड़ यात्राओं में शामिल कर दिया है। रास्ते में लोग न सिर्फ कांवड़ को देखने के लिए रुक रहे हैं, बल्कि आकाश का उत्साह भी बढ़ा रहे हैं।

अब बिहार के अमित की अनोखी भक्ति ने खींचा सबका ध्यान

उत्तर प्रदेश के आकाश सैनी की विशाल कांवड़ के बाद बिहार के बेगूसराय के अमित कुमार की यात्रा भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।अमित कुमार ने सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की यात्रा आंखों पर पट्टी बांधकर पूरी करने का संकल्प लिया है। उनकी इस अनोखी यात्रा को देखकर श्रद्धालु उन्हें प्यार से ‘नयनबंद डाकबम’ कह रहे हैं। अमित कुमार ने सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेने के बाद अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। इसके बाद उन्होंने यात्रा शुरू की।

उनका संकल्प है कि जब तक वह देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन नहीं कर लेते, तब तक अपनी आंखों से किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देखेंगे। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि उनके लिए आस्था और संकल्प की परीक्षा है। अमित का भरोसा है कि बाबा भोलेनाथ खुद उनकी राह आसान करेंगे और उन्हें सुरक्षित अपने दरबार तक पहुंचाएंगे।

105 किलोमीटर की राह, लेकिन हौसला नहीं हुआ कमजोर

सुल्तानगंज से देवघर की यात्रा करीब 105 किलोमीटर लंबी है। इस कठिन रास्ते पर आंखों पर पट्टी बांधकर आगे बढ़ना अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण संकल्प है।अमित की यात्रा देखने के लिए भी रास्ते में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। लोग उनकी भक्ति और दृढ़ संकल्प को देखकर हैरान हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

आखिर सावन में ही क्यों निकलते हैं कांवड़िया?

कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि करोड़ों शिव भक्तों की आस्था से जुड़ी परंपरा है। सावन के महीने में श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लेकर पैदल शिवालयों तक पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव को जल अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही विश्वास लाखों श्रद्धालुओं को हर साल कांवड़ यात्रा के लिए प्रेरित करता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष निकलने से सृष्टि पर बड़ा संकट पैदा हो गया था। देवताओं और संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। मान्यता है कि विष के प्रभाव से भगवान शिव का शरीर तपने लगा। इसके बाद देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया, जिससे उन्हें शीतलता मिली। इसी कथा से सावन में भगवान शिव के जलाभिषेक की परंपरा को जोड़ा जाता है। भक्त पवित्र नदियों से जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं और भोलेनाथ से सुख-समृद्धि तथा मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

आकाश और अमित की कांवड़ क्यों बनी चर्चा का केंद्र?

एक तरफ 301 लीटर जल वाली विशाल कांवड़, दूसरी तरफ आंखों पर पट्टी बांधकर 105 किलोमीटर यात्रा का संकल्प लिए आकाश सैनी और अमित कुमार की यात्राओं ने इस बार कांवड़ यात्रा को लेकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दोनों की यात्रा का तरीका अलग है, लेकिन मंजिल एक ही है—भोलेनाथ की भक्ति और उनके दरबार तक पहुंचना। यही वजह है कि रास्ते में इनकी कांवड़ देखने और इनका उत्साह बढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।