रांची: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव हजरत मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के रांची आगमन पर जमीयत की बुद्धिजीवी बैठक में उनका भव्य एवं गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बैठक में सामाजिक, शैक्षिक और जनसेवा के क्षेत्र से जुड़े लोगों ने संस्था की गतिविधियों और समाजहित में किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।

आजादी की लड़ाई से समाजसेवा तक जमीयत के योगदान की सराहना
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का देश की आजादी की लड़ाई से लेकर वर्तमान समय तक सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वक्ताओं ने वर्ष 1919 से संस्था द्वारा सामाजिक, शैक्षिक, मानवीय और जनकल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

झारखंड में सामाजिक सेवा को मजबूत करने का प्रस्ताव
वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के दौरान भी जमीयत ने जरूरतमंद लोगों तक पहुंचकर उनकी मदद करने का प्रयास किया है। लंबे समय से जारी सामाजिक और मानवीय सेवाओं को बैठक में उल्लेखनीय बताते हुए इसे और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई। लोक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद नौशाद ने मौलाना हकीमुद्दीन कासमी से विशेष अनुरोध किया कि झारखंड में सामाजिक मानव सेवा और जनजागरूकता से जुड़े अभियानों को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है।

जिला स्तर पर विशेषज्ञों की कमेटी बनाने का सुझाव
मोहम्मद नौशाद ने सुझाव दिया कि झारखंड के सभी क्षेत्रों में काम को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और समाज के सक्रिय लोगों को साथ लेकर जिला स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाए। उनका कहना था कि विशेषज्ञों और जमीनी स्तर पर सक्रिय लोगों को एक मंच पर लाने से सामाजिक सेवा के कार्य अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकते हैं। मोहम्मद नौशाद ने बताया कि सामाजिक सेवा को मजबूत करने से जुड़ा यह प्रस्ताव जमीयत की आगामी प्रोफेशनल मीटिंग में भी रखा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पर चर्चा के बाद झारखंड में सामाजिक सेवा और जनजागरूकता के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी।

हजारों लोगों को संगठन से जोड़ने पर जोर
लोक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन की सफलता के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत संपर्क और सक्रिय कार्यकर्ताओं की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा और जागरूकता के अभियानों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को सदस्यता देकर संगठन से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग सामाजिक कार्यों से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाएं तो जरूरतमंदों की सहायता के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, जनजागरूकता और अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है।

मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने प्रस्तावों का किया स्वागत
बैठक में रखे गए सुझावों और प्रस्तावों का मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने स्वागत किया। उन्होंने सामाजिक सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग और मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मौलाना कासमी ने लोक सेवा समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मोहम्मद नौशाद को दिल्ली आने का निमंत्रण भी दिया और उम्मीद जताई कि आपसी सहयोग से झारखंड में सामाजिक सेवा तथा जनजागरूकता के कार्यों को और व्यापक बनाया जा सकेगा।


सामाजिक सेवा को नई दिशा देने का संकल्प
बैठक के अंत में मौजूद लोगों ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भविष्य में बेहतर समन्वय के साथ काम करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद और लोक सेवा समिति से जुड़े पदाधिकारियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।