नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची यानी (Special Intensive Revision) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं, AISA समेत कई छात्र और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची से जुड़े विवादों की जांच हो।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और आस-पास के इलाकों में पहुंचे. पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और कई स्थानों से लोगों को हिरासत में लिया गया।
AAP के कई बड़े नेता हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी की नेता और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और राज्यसभा सांसद संजय सिंह समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी हिरासत में लिए गए। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, 700 के आस-पास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए गया.
कांग्रेस ने भी किया मार्च
कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी जंतर-मंतर की तरफ मार्च करने की कोशिश की। इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने कार्यालय से जंतर-मंतर की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुचिता और हर वोट की सुरक्षा के लिए जवाबदेह है और SIR को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
AISA और दूसरे छात्र संगठन भी सड़क पर
AISA, SFI और अन्य छात्र संगठनों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े विवादों पर जवाबदेही की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी।
जंतर-मंतर पर भारी पुलिस तैनाती
प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में निषेधाज्ञा लागू की गई थी। दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की। 13 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया था. दिन भर इंटरनेट भी बंद रहा.
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का यू टर्न
इसी बीच चुनाव आयोग ने SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे योग्य मतदाताओं को दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जिनके नाम मतदाता सूची से छूट गए हों। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले पात्र मतदाता भी शामिल हैं। ऐसे मतदाता Form 6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। बिहार भी उन राज्यों में शामिल है जहां SIR पूरा हो चुका है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि SIR को लेकर लिए गए फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के मुताबिक, जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उन्हें लगातार मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने की सुविधा दी जा रही है।
चुनाव आयोग लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR को लेकर विवाद उस समय और तेज हुआ जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची और ECINet से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। आयोग ने बाद में ECINet की समीक्षा और मतदाता सुविधा से जुड़े कई कदमों की घोषणा की। SIR पूरा हो चुके राज्यों में Form-6 से जुड़ी अतिरिक्त SIR घोषणा हटाई गई है।
बता दें कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन चुनाव आयोग में हुई इसी व्यापक गड़बड़ी को लेकर हुआ है। विपक्षी दल और छात्र-सामाजिक संगठन ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग SIR की प्रक्रिया और अपने फैसलों का बचाव कर रहा है।
