तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसने युद्धविराम के कथित उल्लंघन के बाद बहरीन और कुवैत समेत क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के कम से कम 85 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से किए गए हालिया हवाई हमलों के जवाब में की गई।
ईरानी मीडिया और प्रेस टीवी की रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में बहरीन स्थित अमेरिकी यूएस फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय और कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस को निशाना बनाया गया। ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के दक्षिणी हिस्से में अमेरिका के एक MQ-9 Reaper ड्रोन को मार गिराया है।
इससे पहले अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों में कई सैन्य और तटीय ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। तेहरान ने इन हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन करार देते हुए जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिकी हमले ईरान के दक्षिणी प्रांतों और रणनीतिक तटीय क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए।
दरअसल तनाव की पृष्ठभूमि में होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को लेकर विवाद भी शामिल है। 24 जून को ओमान और इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाने की घोषणा की थी, जिसकी निगरानी अमेरिका कर रहा था। हालांकि, ईरान ने इस व्यवस्था को अस्वीकार करते हुए कहा कि बिना तेहरान की सहमति के किसी भी समुद्री मार्ग को मान्यता नहीं दी जाएगी।
वहीं, इसके बाद क्षेत्र में कई जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आईं, जिसके चलते अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और बढ़ गया। दोनों देशों के बीच 28 जून को संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी और बाद में कतर में अप्रत्यक्ष तकनीकी वार्ता भी हुई, लेकिन हालिया घटनाओं ने एक बार फिर पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास स्थिति को शांत कर पाते हैं या नहीं।
