Imam Khamenei funeral: इराक के पवित्र शहर नजफ (Najaf ) में इमाम Ali Khamenei के जनाज़े का जुलूस बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार लगभग 6 बजे शुरू हुआ और कई घंटों तक चला. जनाज़े को शहर के प्रमुख मार्गों से गुज़ारा गया, जहाँ लाखों लोग अंतिम दीदार के लिए घंटों पहले से मौजूद थे। जुलूस के रास्ते में लोग हाथों में तस्वीरें, झंडे और बैनर लिए खड़े दिखाई दिए।

भीड़ का ऐसा सैलाब कि तिल रखने की जगह नहीं
स्थानीय प्रशासन और आयोजकों के अनुसार जनाज़े में शामिल लोगों की संख्या लाखों में थी। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में यह संख्या 20 लाख से अधिक बताई गई है। सड़कों, गलियों और इमारतों की छतों तक पर लोग दिखाई दे रहे थे। कई लोगों ने इस दृश्य की तुलना अरबईन और आशूरा के अवसर पर उमड़ने वाली भीड़ से की।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम
इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए इराकी प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की थी। पुलिस, सेना और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती पूरे मार्ग पर की गई थी। जनाज़े के रास्तों को पहले से चिन्हित किया गया था और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष नियंत्रण कक्ष बनाए गए थे। हजारों सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने में लगे रहे।

राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान भी रहे मौजूद
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान (Masoud Pezeshkian) भी नजफ़ पहुँचे और उन्होंने जनाज़े की रस्मों में हिस्सा लिया। उनके साथ ईरानी अधिकारियों और वरिष्ठ धार्मिक नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। नजफ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इराकी अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

विलाप और मातम से गूंज उठा नजफ़
जनाज़े के दौरान भावनात्मक दृश्य देखने को मिले। कई लोग फूट-फूट कर रोते दिखाई दिए, जबकि कुछ श्रद्धालु मातम करते हुए जनाज़े के साथ चल रहे थे। “लब्बैक या खामेनेई” और अन्य नारों के बीच पूरा वातावरण गम और श्रद्धांजलि की भावना से भरा हुआ था। कई लोगों की आँखों में आँसू थे और वे इसे अपने जीवन के सबसे भावुक क्षणों में से एक बता रहे थे।

हर कोई जनाजे के पास पहुंचना चाहता था- मौलाना मुराद
शहीद अली खामेनेई को खिराजे अकिदत पेश करने के लिए वहां मौजदू मौलाना मुराद हुसैन जाफरी ने बताया कि जैसे ही शहीद खामेनेई का जनाजा मौला अली के हरम में पहुंचा, वहां मौजूद लाखों की सख्यां में लोग फूट-फूटकर रो पड़े. हर कोई उनके जनाने के करीब पहुंचना चाहता था, लेकिन लाखों की भीड़ की वजह से सैकड़ों लोगों ने दूर से ही अपनी नम आखों से उन्हें खिराज-ए-अखिदत पेश की. उन्होंने कहा कि इमाम खामेनेई का जानाजा इराक आना हमारे लिए खुशकिस्मती की बात है. इराक के लोग चाहते थे कि उनका जानाजा यहां लाया जाए और इसलिए ईराक की सरकार ने तमाम सुरक्षा व्यवस्था के साथ नजफ और करबला में उनके जनाजे को लाने की व्यवस्था की.

क्यों खास है नजफ़? क्यों उमड़ा जनसैलाब?
इराक का पवित्र शहर नजफ दुनिया भर के करोड़ों शिया मुसलमानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यही वह स्थान है, जहाँ इमाम अली इब्न अबी तालिब का रौज़ा मुबारक स्थित है। इमाम अली पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे तथा शिया मुसलमान उन्हें अपना पहला इमाम मानते हैं। यही कारण है कि नजफ़ को शिया इस्लाम की आध्यात्मिक राजधानी भी कहा जाता है।

नजफ़ केवल इमाम अली के रौज़े की वजह से ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने और बड़े शिया धार्मिक शिक्षण केंद्रों में से एक “हौज़ा-ए-इल्मिया” की वजह से भी प्रसिद्ध है, जहाँ दुनिया भर से धार्मिक छात्र शिक्षा प्राप्त करने आते हैं।

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