पटना: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद पूरी तरह सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने पांच सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें से तीन सीटों पर कांग्रेस और RJD के उम्मीदवार सीधे आमने-सामने होंगे। वहीं, दो सीटों पर कांग्रेस ने ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जहां RJD ने फिलहाल अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। कांग्रेस ने डॉ. असदुल्लाह खान, रजनीकांत पाठक, मनोज कुमार जायसवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा और संजय कुमार यादव को एमएलसी का टिकट दिया है.
तीन सीटों पर RJD-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला
कांग्रेस ने पटना ग्रेजुएट सीट से डॉ. असदुल्लाह खान, दरभंगा ग्रेजुएट सीट से रजनीकांत पाठक और कोसी ग्रेजुएट सीट से मनोज कुमार जायसवाल को उम्मीदवार बनाया है। इन तीनों सीटों पर RJD पहले ही अपने उम्मीदवार घोषित कर चुका है। पटना ग्रेजुएट सीट से RJD ने दिलीप कुमार, दरभंगा ग्रेजुएट सीट से अनिल कुमार झा और कोसी ग्रेजुएट सीट से नितेश कुमार को मैदान में उतारा है। इस तरह इन तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में महागठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
दो सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार, RJD ने नहीं उतारा प्रत्याशी
कांग्रेस ने दरभंगा टीचर्स सीट से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पटना टीचर्स सीट से संजय कुमार यादव को टिकट दिया गया है। इन दोनों सीटों पर RJD की ओर से फिलहाल कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में इन सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों के सामने RJD का सीधा मुकाबला नहीं है।
चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर उठे सवाल
कांग्रेस के पांच उम्मीदवारों की घोषणा के बाद महागठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खास तौर पर उन तीन सीटों पर स्थिति महत्वपूर्ण है, जहां कांग्रेस और RJD ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। महागठबंधन के घटक दलों के बीच चुनाव से पहले सीटों को लेकर सहमति नहीं बन पाने का असर चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। वहीं, वामपंथी दलों ने भी अलग-अलग सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला और बहुकोणीय हो सकता है।
अब नजर इस बात पर होगी कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद महागठबंधन के घटक दलों के बीच किसी तरह का समझौता होता है या कांग्रेस और RJD अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में बने रहते हैं।
