न्यूयार्क/ नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों का सीधे जवाब दिया। पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान को आतंकवादी बताना वास्तविकता को उलटकर पेश करना है। उन्होंने कहा कि ईरान खुद आतंकवाद और हमलों का शिकार रहा है।
पेज़ेश्कियान अपने संबोधन में मारे गए ईरानी बच्चों की तस्वीरें लेकर पहुंचे थे। उन्होंने मिनाब के एक स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष बच्चों को निशाना बनाया गया। उन्होंने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की तस्वीर भी दिखाई और आरोप लगाया कि उनकी हत्या बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के की गई।

ट्रंप को दिया बातचीत का संदेश
पेज़ेश्कियान ने एक तरफ अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख रखा, तो दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि ईरान डायलॉग, कूटनीति और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी या ताकत के इस्तेमाल की भाषा स्वीकार नहीं करेगा। उनका संदेश था कि दबाव डालकर ईरान को झुकाया नहीं जा सकता।
परमाणु बम पर ईरान का क्या रुख?
ईरानी राष्ट्रपति ने परमाणु कार्यक्रम पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अपने अधिकार पर किसी तरह की पाबंदी स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार परमाणु तकनीक ऊर्जा, उद्योग और विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने परमाणु हथियार और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के बीच अंतर पर जोर दिया।
पेज़ेश्कियान ने इस मुद्दे पर इजरायल की ओर भी इशारा करते हुए परमाणु हथियारों को लेकर दोहरे मानदंड का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब ईरान से निरीक्षण और प्रतिबंधों की बात की जाती है, तो इजरायल के परमाणु हथियारों पर भी समान सवाल होने चाहिए।
होर्मुज पर भी साफ संदेश
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने जलमार्गों के अधिकार को किसी दबाव में छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध का विस्तार क्षेत्र में सुरक्षा नहीं, बल्कि और अस्थिरता पैदा करेगा।
‘तकनीक का इस्तेमाल कर हो रहा नरसंहार’
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान गाजा और ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद तेहरान में हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या हुई। पेजेश्कियान ने गाजा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान के लिए किया जा रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश अपनी ताकत का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर प्रभुत्व कायम करने के लिए नहीं करना चाहता। उनका कहना था कि ईरान अपनी सुरक्षा को किसी दूसरे देश की कमजोरी से जोड़कर नहीं देखता। हालांकि, अपनी रक्षा के मामले में ईरान किसी बाहरी शक्ति से अनुमति लेने के पक्ष में नहीं है।
शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख
पेजेश्कियान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक हासिल करना ईरानी जनता का अधिकार है। उनके मुताबिक परमाणु तकनीक का इस्तेमाल चिकित्सा, कृषि, उद्योग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विकास के लिए किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की रक्षा क्षमता का उद्देश्य किसी देश पर हमला करना नहीं, बल्कि संभावित आक्रमण को रोकना है। तेहरान अपने रक्षा संबंधी फैसलों में किसी बाहरी देश की अनुमति को जरूरी नहीं मानता।
युद्ध नहीं, समझौते से समाधान की बात
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम का विवाद सैन्य कार्रवाई के जरिए नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे समझौते की आवश्यकता बताई, जिसमें ईरान के अधिकारों का सम्मान हो और उसके परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण स्वरूप की गारंटी मिले।
मजबूत पड़ोसी चाहते हैं पेजेश्कियान
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों को प्रतिद्वंद्वी के तौर पर नहीं देखता। उनका कहना था कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए मजबूत और सुरक्षित पड़ोसी जरूरी हैं। उन्होंने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाया और कहा कि क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाली गतिविधियों के बीच केवल ईरान पर दबाव बनाना उचित नहीं है। पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने आसपास के देशों के साथ टकराव के बजाय सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहता है।
दुनिया को क्या संदेश दिया?
पेज़ेश्कियान के पूरे संबोधन में तीन प्रमुख संदेश दिखाई दिए. ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा, शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अधिकार नहीं छोड़ेगा और बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करेगा। उन्होंने फिलिस्तीन और गाजा का भी जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के लिए फिलिस्तीन के सवाल का समाधान जरूरी है। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पेज़ेश्कियान के भाषण के दौरान सदन से बाहर चला गया। बता दें कि इससे एक दिन पहले डोनालंड ट्रंप ने भी इरान को लेकर कई कड़े बयान दिए थे, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ समझौता नहीं होने की स्थिति में बेहद कठोर कार्रवाई की बात कही थी।
