पटना: बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान मंगलवार (20 अक्टूबर) को विजयादशमी के अवसर पर आस्था, उत्साह और उल्लास से सराबोर नजर आया। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण दहन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान पहुंचे। जैसे ही भगवान श्रीराम ने प्रतीकात्मक रूप से बाण चलाया, रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतले धू-धूकर जल उठे। आसमान में उठती आग की लपटों, रंग-बिरंगी आतिशबाजी और जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारों से पूरा गांधी मैदान गूंज उठा।
इस बार रावण दहन समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण पुतलों की विशाल ऊंचाई और उनमें लगाए गए विशेष आतिशबाजी के इंतजाम रहे। जैसे ही पुतलों में आग लगी, वहां मौजूद दर्शकों ने तालियां बजाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का स्वागत किया।
90 फीट का रावण बना आकर्षण का केंद्र
पटना के गांधी मैदान में इस बार रावण का पुतला 90 फीट ऊंचा बनाया गया था। वहीं मेघनाद की ऊंचाई 85 फीट और कुंभकर्ण की ऊंचाई 80 फीट रखी गई थी। तीनों पुतलों की ऊंचाई का कुल योग 255 फीट था।
विशालकाय पुतलों को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। रावण के दस सिर और भव्य स्वरूप को देखने के लिए लोगों में खास उत्सुकता थी। समारोह शुरू होने से पहले ही दर्शक अपने मोबाइल फोन से पुतलों की तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए।
रावण दहन के दौरान विशेष आतिशबाजी ने आयोजन को और भी रोमांचक बना दिया। रावण की आंखों से निकलते अंगारे, मुंह से उठती आग की लपटें और कानों तथा कंधों से निकलता रंगीन धुआं लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
जैसे ही रावण के पुतले में आग लगी, पूरा मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। कुछ ही पलों में विशालकाय पुतला आग की लपटों में घिर गया। इसके साथ ही मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का भी दहन किया गया।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दिखा उत्साह
गांधी मैदान में रावण दहन का नजारा देखने पहुंचे लोगों में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। परिवार के साथ आए बच्चों के लिए विशालकाय पुतले और आतिशबाजी विशेष आकर्षण रहे। वहीं युवाओं ने मोबाइल फोन से इस यादगार पल को रिकॉर्ड किया।
रावण दहन के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट और धार्मिक जयकारों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। लोगों ने विजयादशमी के इस आयोजन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश ग्रहण किया।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री समारोह में हुए शामिल
पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य रावण दहन समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही।
गांधी मैदान में रावण दहन की परंपरा पटना की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित होने वाला यह समारोह हर साल बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है।
रावण दहन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू धर्म में विजयादशमी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। इसी की स्मृति में देशभर में दशहरे के अवसर पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है।
रावण दहन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों का संदेश देने वाली परंपरा भी है। यह पर्व बताता है कि अहंकार, अन्याय और अत्याचार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और न्याय की ही विजय होती है।
गांधी मैदान में यादगार बना विजयादशमी का उत्सव
पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस समारोह ने एक बार फिर विजयादशमी की सांस्कृतिक भव्यता को सामने रखा। 90 फीट ऊंचे रावण का दहन, शानदार आतिशबाजी और लोगों का उत्साह इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के दहन के साथ लोगों ने बुराई को त्यागने और अच्छाई के रास्ते पर चलने का संदेश लिया। गांधी मैदान में गूंजते जय श्रीराम के जयकारों के बीच विजयादशमी का यह आयोजन उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
