नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी. इसके बावजूद 10 अक्टूबर को सीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर मंतर पर जाने का ऐलान कर दिया था. इसे देखते हुए. इसे लेकर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए कई स्तरों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई. हजारों की संख्या में पुलिस बल दिल्ली में तैनात कर दिए गए. मैट्रो बंद , ट्रेनें बंद और घर-घर जा कर लोगों को डिटेन तक करने की खबर सामने आई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 9 अक्टूबर को ही राजधानी में करीब 25,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई. सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • 37 ब्लॉकिंग पॉइंट: नई दिल्ली जिले में आवाजाही रोकने और जांच करने के लिए 37 स्थानों पर नाकेबंदी की योजना बनाई गई।
  • 15 डिटेंशन सेंटर: दिल्ली पुलिस के सभी 15 जिलों में हिरासत में लिए जाने वाले लोगों के लिए अलग-अलग केंद्र निर्धारित किए गए।
  • दिल्ली की सीमाओं पर निगरानी: दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों और यात्रियों की जांच की गई।
  • एनडीएमसी और मध्य दिल्ली में कड़ी सुरक्षा: जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जनपथ और पटेल चौक जैसे इलाकों में यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
  • इंटरनेट पर पाबंदी: जंतर-मंतर के आसपास लगभग चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने की व्यवस्था की गई थी। पुलिस का कहना था कि प्रतिबंधों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पिछली बार जैसी स्थिति दोबारा पैदा होने से रोकना है। दूसरी ओर, CJP के नेताओं ने इन कदमों को प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुंचने से रोकने की कोशिश बताया।

250 से ज्यादा ट्रेनें रद्द, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
CJP के प्रदर्शन का असर दिल्ली आने-जाने वाले रेल यात्रियों पर भी पड़ा। 250 से अधिक ट्रेनों को रद्द किया गया। 75 से अधिक लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ 179 लोकल ट्रेनों को भी रोका गया, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का समाना करना पड़ा. 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच इन दोनों स्टेशनों पर आने वाली कुछ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द करने का फैसला किया गया था। बिहार और झारखंड से दिल्ली आने वाले यात्रियों के लिए भी यह स्थिति परेशानी भरी रही। मीडिया रिपोर्टों में तेजस, राजधानी, मगध और संपूर्ण क्रांति जैसी ट्रेनों को रद्द किया गया.

दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशन किए गए बंद
रेल सेवाओं के साथ मेट्रो पर भी व्यापक प्रतिबंध लगाए गए। रॉयटर्स की 10 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद किए गए थे। ताकि प्रदर्शनकारी किसी भी तरह जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सके.

मेट्रो और रेल सेवाओं पर एक साथ प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ये सवाल उठे कि किसी एक स्थान पर प्रस्तावित प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर इतने व्यापक प्रतिबंध लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। विपक्ष ने सवाल खड़े किए कि क्या अब जनता को आंदोलन करने भी नहीं दिया जाएगा. जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है. सरकार देश के युवाओं से डरी हुई है और पूरी तरह ज्ञानेश कुमार के बचाव में उतर गई है.

वहीं सरकार की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने CJP के विरोध-प्रदर्शन के कारण ट्रेनों के रद्द होने पर एक अहम बयान दिया है। पासवान ने बीते शुक्रवार को कहा कि ट्रेनें रद्द करके या ट्रांसपोर्ट के साधनों में रुकावट डालकर देश के युवाओं को रोका नहीं जा सकता। चिराग पासवान ने कहा कि ये भारत के युवा हैं और इन्हें कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने पूछा कि कोई कितनी ट्रेनों को रोक सकता है? कितनी कनेक्टिविटी में बाधा डाल सकता है? कितनी सड़कों को ब्लॉक कर सकता है? ये भारत के युवा हैं; उनमें दुनिया को एक नई दिशा दिखाने की क्षमता है—ठीक वैसे ही जैसे पिछली पीढ़ियों ने किया है। ऐसे में, उन्हें रोका नहीं जा सकता।

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