नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज यानी HLCDC की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांगी गई विस्तृत जानकारी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। खास बात यह है कि कई मामलों में पिछले 15 वर्षों के आंकड़े धर्म के आधार पर मांगे गए हैं। इसे लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की मंशा और कमेटी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमेटी ने राज्यों से जन्म पंजीकरण, स्कूलों में दाखिले, वोटर रजिस्ट्रेशन, राशन कार्ड, वाहनों के पंजीकरण और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में मंदिर, मस्जिद, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों की संख्या तथा उनकी लोकेशन से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।
फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड भी मांगा
कमेटी ने जमीन की खरीद-बिक्री, मालिकाना हक में बदलाव और कुछ इलाकों में जमीन के असामान्य तरीके से एक जगह केंद्रित होने से जुड़े आंकड़ों पर भी जानकारी मांगी है। वोटर आईडी, आधार और राशन कार्ड के रजिस्ट्रेशन में अचानक हुई बढ़ोतरी तथा फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
मामला सिर्फ धार्मिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। कमेटी ने आदिवासी इलाकों में धार्मिक संरचना में बदलाव, धर्म परिवर्तन से जुड़ी सरकारी स्टडी और रिपोर्टों तथा सीमावर्ती जिलों और तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या बदलाव की जानकारी भी मांगी है। बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों, फर्जी दस्तावेज, डिटेंशन सेंटर और मानव तस्करी या संगठित अपराध से जुड़े मामलों का विवरण भी मांगा गया है।
जयराम रमेश ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कमेटी की कवायद पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसके पीछे पहले से तय एजेंडा और पूर्वाग्रह दिखाई देता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कमेटी की रिपोर्ट का निष्कर्ष पहले से तय है। हालांकि, कमेटी की ओर से ऐसी किसी तैयार रिपोर्ट की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
कई राज्यों के अधिकारियों के सामने व्यावहारिक दिक्कत भी है। उनका कहना है कि सरकारी विभागों में हर रिकॉर्ड धर्म के आधार पर दर्ज नहीं किया जाता, इसलिए मांगी गई पूरी जानकारी उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा। गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को HLCDC का गठन किया था। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना तथा उनसे निपटने के उपाय सुझाना है।
अब विपक्ष पूछ रहा है कि धर्म के आधार पर इतने बड़े पैमाने पर आंकड़े जुटाने की जरूरत क्यों पड़ी और इस डेटा का आगे इस्तेमाल किस नीति के लिए होगा? बता दें कि सरकार की ओर से कमेटी के घोषित उद्देश्य का आधार जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध आव्रजन है, वहीं विपक्ष अब इस प्रक्रिया के राजनीतिक और सामाजिक असर पर सवाल उठा रहा है।
