न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के बीच भारत ने मध्य यूरोप के चार महत्वपूर्ण देशों के साथ अपनी कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में पहली बार V4+India विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। V4 यानी पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेकिया का समूह है। बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हिस्सा लिया।

UNGA के हाई-लेवल वीक में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार जयशंकर 26 सितंबर को UNGA के General Debate को संबोधित करेंगे और इसके अलावा कई द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।

V4+India बैठक में क्या हुआ?
यह बैठक खास इसलिए है क्योंकि यह V4 और भारत के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक थी। इसमें व्यापार और निवेश, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, रक्षा और सुरक्षा, कनेक्टिविटी, शिक्षा, मोबिलिटी, सप्लाई चेन और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने बैठक को ‘नया ऐतिहासिक अवसर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत और V4 देशों के बीच विदेश मंत्रियों की बैठक अब हर साल होगी। साथ ही भारत और V4 देशों के बीच एक Annual Business Forum बनाने पर भी सहमति बनी है। इसका उद्देश्य दोनों तरफ की कंपनियों और कारोबारियों को सीधे जुड़ने का मंच देना है।

भारत की UNSC दावेदारी का समर्थन
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी से जुड़ा रहा। पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेकिया ने भारत की स्थायी UNSC सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि Global South के महत्वपूर्ण देश और Indo-Pacific की उभरती शक्ति के रूप में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह मिलनी चाहिए।

हालांकि, यह समर्थन अपने आप में UNSC सुधार को लागू नहीं करता। सुरक्षा परिषद का विस्तार संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और UN Charter में बदलाव की प्रक्रिया से जुड़ा है। भारत और V4 देशों के बीच आर्थिक सहयोग को केवल सरकारी बातचीत तक सीमित रखने के बजाय बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित Business Forum में कंपनियां, निवेशक, उद्योग संगठन और अन्य कारोबारी हितधारक शामिल हो सकते हैं।

भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश चल रही है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA वार्ताओं के निष्कर्ष के बाद भारत ने इसके शीघ्र हस्ताक्षर और क्रियान्वयन को व्यापार तथा निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताया है। जून 2026 में भारत और स्लोवाकिया ने भी FTA से मिलने वाले नए व्यापारिक अवसरों और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया था।

यूक्रेन और खाड़ी संकट पर भी चर्चा
V4 बैठक और UNGA के इतर जयशंकर की यूरोपीय समकक्षों के साथ बातचीत में यूक्रेन संकट, खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम, Indo-Pacific और बहुपक्षीय व्यवस्था जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। भारत ने UN संस्थाओं में सुधार और Global South की बेहतर भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया है।

भारत के लिए V4 क्यों महत्वपूर्ण?
बता दें कि विसेग्राड समूह (Visegrád Group) की स्थापना 1991 में हुई थी और इसमें चेकिया, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया शामिल हैं। यह चारों देश मध्य यूरोप में स्थित हैं और यूरोपीय संघ के सदस्य हैं। इसलिए V4 के साथ अलग से मजबूत संवाद भारत को यूरोप के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संपर्क बढ़ाने का अतिरिक्त मंच देता है।

अब हर साल विदेश मंत्रियों की बैठक और Business Forum का प्रस्ताव इस संबंध को नियमित और संस्थागत बनाने की कोशिश है। इसका असर आगे चलकर निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। कुल मिलाकर, UNGA 2026 के दौरान भारत-V4 बैठक सिर्फ एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं रही। चारों देशों का UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन, सालाना विदेश मंत्री बैठक और Business Forum की घोषणा—तीनों मिलकर भारत और मध्य यूरोप के रिश्तों को एक नए संस्थागत ढांचे की ओर ले जाते हैं।

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