नई पीढ़ी को सीरत-ए-तैयबा से जोड़ने और समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव व भाईचारे को बढ़ावा देने पर जोर

हजारीबाग: सीरत-ए-रसूल ﷺ की शिक्षाओं को आम लोगों, विशेष रूप से नई पीढ़ी तक सरल, प्रभावी और सहज भाषा में पहुंचाने के उद्देश्य से हजारीबाग में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीरत-ए-नबवी ﷺ के संदेश को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए एक नई पहल की शुरुआत करने पर सहमति बनी।यह बैठक विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. इनाम नबी सिद्दीकी के आवास पर आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत्त डिप्टी लेबर कमिश्नर शाहनवाज अहमद खान ने की। बैठक में मौजूद लोगों ने सीरत-ए-तैयबा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

सीरत-ए-नबवी ﷺ को आम लोगों तक पहुंचाने की पहल

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की मुबारक जिंदगी और उनकी शिक्षाएं केवल धार्मिक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। इसलिए सीरत-ए-नबवी ﷺ के संदेश को समाज के हर वर्ग और खास तौर पर युवाओं तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।वक्ताओं के अनुसार, रसूल-ए-अकरम ﷺ की सीरत में प्रेम, इंसानियत, न्याय, समानता, सहनशीलता, क्षमा, अच्छे व्यवहार और भाईचारे की ऐसी शिक्षाएं मौजूद हैं, जो आज के दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

नई पीढ़ी को सीरत से जोड़ने के लिए नए तरीकों पर जोर

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आज की युवा पीढ़ी तक सीरत का संदेश पहुंचाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक और प्रभावी माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।सीरत-ए-नबवी ﷺ के विभिन्न पहलुओं को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करने की जरूरत बताई गई, ताकि युवा न केवल पैगंबर-ए-अकरम ﷺ की जिंदगी और शिक्षाओं को समझें, बल्कि उन्हें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपनाने की भी कोशिश करें।

सर्वसम्मति से बनी ‘सीरत कमेटी हजारीबाग’

बैठक में सर्वसम्मति से ‘सीरत कमेटी हजारीबाग’ के गठन का निर्णय लिया गया। समिति का उद्देश्य हजारीबाग शहर और आसपास के क्षेत्रों में सीरत-ए-नबवी ﷺ के संदेश को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाना होगा।प्रारंभिक रूप से प्रसिद्ध सामाजिक एवं साहित्यिक व्यक्तित्व अबुल फैज हाशमी उर्फ नटखट अजीमाबादी को समिति का संयोजक चुना गया।

लेखन, विचार-विमर्श और जागरूकता कार्यक्रमों पर होगा जोर

समिति के माध्यम से सीरत-ए-तैयबा के विभिन्न पहलुओं पर शैक्षिक, वैचारिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।बैठक में यह भी तय किया गया कि पैगंबर हजरत मुहम्मद ﷺ की सुन्नत और सीरत से जुड़े विभिन्न विषयों पर लेख और शोधपरक सामग्री तैयार की जाएगी। इन लेखों के माध्यम से सीरत के संदेश को तार्किक, ज्ञानवर्धक और सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।समिति भविष्य में सीरत से जुड़े कार्यक्रम, परिचर्चाएं और अन्य गतिविधियां आयोजित करने पर भी विचार करेगी।

चरित्र निर्माण में सीरत की अहम भूमिका

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सीरत-ए-नबवी ﷺ का अध्ययन केवल धार्मिक जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।पैगंबर-ए-अकरम ﷺ की जिंदगी में इंसानियत, अच्छे आचरण, धैर्य, क्षमा, न्याय, समानता और कमजोर लोगों के साथ करुणा एवं अच्छे व्यवहार की अनगिनत मिसालें मिलती हैं।प्रतिभागियों ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के भीतर प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए इन शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

30 अगस्त को होगी अगली बैठक

समिति की अगली बैठक 30 अगस्त को पगमल स्थित होटल ग्रैंड पैलेस, हजारीबाग में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।आगामी बैठक में शहर और आसपास के क्षेत्रों की अधिक से अधिक सामाजिक, शैक्षिक, बौद्धिक और प्रतिष्ठित हस्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। समिति के विस्तार और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।

सीरत से जुड़े कार्यक्रमों की बनेगी रूपरेखा

आयोजकों के अनुसार, अगली बैठक में सीरत-ए-नबवी ﷺ के विभिन्न विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करने, लेखन एवं वैचारिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने और समिति के कार्यक्षेत्र को व्यापक बनाने पर चर्चा होगी।समिति का प्रयास रहेगा कि सीरत-ए-तैयबा का संदेश केवल एक सीमित वर्ग तक न रहे, बल्कि समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। विशेष रूप से युवाओं को इस महान विरासत से जोड़ने के लिए सरल और प्रभावी कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।

कई प्रमुख लोगों ने बैठक में लिया हिस्सा

प्रारंभिक बैठक में सैयद उबैदुल्लाह हाशमी, डॉ. मोहम्मद चांद निजामी, तामीरुद्दीन, नमूद आलम खान, प्रोफेसर सैयद कैसर आलम, डॉ. जकीउल्लाह मिस्बाही और पत्रकार अनवर फ़िदवी सहित कई प्रमुख लोगों ने भाग लिया।सभी प्रतिभागियों ने सीरत कमेटी के गठन का स्वागत करते हुए इसे समाज की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप एक सकारात्मक पहल बताया।

सीरत-ए-रसूल ﷺ का संदेश प्रेम और सद्भाव के साथ पहुंचाने का संकल्प

बैठक के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि सीरत-ए-रसूल ﷺ की शिक्षाओं को प्रेम, समझदारी और सहज भाषा के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।प्रतिभागियों ने कहा कि पैगंबर-ए-अकरम ﷺ की जिंदगी इंसानियत, शांति, न्याय, करुणा और भाईचारे का महान उदाहरण है। इस संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।बैठक का समापन दुआ के साथ हुआ।

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