विशाखापत्तनम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्रमुख गारंटर है और भारतीय नौसेना इस जिम्मेदारी को पूरी मजबूती और दक्षता के साथ निभा रही है। उन्होंने देश के समुद्री हितों की रक्षा करने और वैश्विक स्तर पर तिरंगे को बुलंद रखने के लिए नौसेना के योगदान की सराहना की।

रक्षा मंत्री 10 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के छठे स्वदेशी प्रोजेक्ट-17ए स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरी’ के कमीशनिंग समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित बाराखाना कार्यक्रम में नौसेना अधिकारियों और जवानों को संबोधित कर रहे थे।

समुद्री सुरक्षा भारत की आर्थिक मजबूती से जुड़ी
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में समुद्री क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि देश का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है। इसके अलावा भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और द्वीपीय क्षेत्रों की सुरक्षा भी समुद्री ताकत पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की रणनीतिक और आर्थिक स्थिरता से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच नौसेना की भूमिका अहम
रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक सुरक्षा वातावरण लगातार जटिल होता जा रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और बाहरी शक्तियों की सक्रियता ने समुद्री सतर्कता की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में भारतीय नौसेना देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने, महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने और पूरे क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा करने का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही है।

‘हिंद महासागर हमारा आंगन, इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी
राजनाथ सिंह ने भारत को हिंद महासागर क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे जिम्मेदार हितधारक बताते हुए कहा कि भारत शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री वातावरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हिंद महासागर क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय नौसेना भविष्य में भी अपनी क्षमता, तकनीक और पराक्रम के दम पर देश के समुद्री हितों की रक्षा करती रहेगी।

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