Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। भूख हड़ताल के 20वें दिन, 17 जुलाई को वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उनके आंदोलन को देश के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक नेताओं का समर्थन मिल रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और ब्रिटेन की रॉयटर्स जैसी प्रमुख मीडिया संस्थाओं ने इस आंदोलन को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। वहीं पाकिस्तान के अखबार डॉन ने भी वांगचुक की बिगड़ती सेहत और आंदोलन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टरों की एक टीम नियमित रूप से उनकी जांच कर रही है। लंबे समय से जारी उपवास के कारण उनकी सेहत को लेकर समर्थकों और शुभचिंतकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
समर्थकों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील
सीजेपी के प्रवक्ताओं का दावा है कि लगातार उपवास, गर्मी और उमस के कारण वांगचुक का वजन तेजी से घटा है और उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हुई है। इसके बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। शुक्रवार को समर्थकों को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, “मैं बाहर से कमजोर हूं, लेकिन अंदर से बहुत मजबूत हूं। हमें 20 जुलाई के लिए इस ऊर्जा की जरूरत है, जब हम संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे और लोकतंत्र के मंदिर में अपनी बात रखेंगे।”
उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, “मैं किसी भी हाल में 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा। अगर आप नहीं आए और 20 जुलाई का प्रदर्शन सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।” अब देश और दुनिया की निगाहें 20 जुलाई को होने वाले ‘संसद चलो’ मार्च पर टिकी हैं, जिसे इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
क्या है सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों की मांग?
दरअसल सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे उस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, जिसकी अगुवाई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा की जा रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए। इसके साथ ही वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
वहीं, केंद्र सरकार ने अब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को स्वीकार नहीं किया है और इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों के साथ कोई औपचारिक बातचीत भी शुरू नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों की जांच की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस्तीफे की मांग पर अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। इधर सोनम वांगचुक की सेहत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही हगै.
