तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई (Ayatollah Ali Khameneiकी अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में कई दिनों तक चले शोक कार्यक्रमों के बाद संपन्न हो गया। उनके पार्थिव शरीर को आखिरकार मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर ईरान ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
तेहरान से शुरू हुई थी अंतिम यात्रा
आयतुल्लाह ख़ामेनेई की अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू हुई, जहाँ हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी की प्रमुख सड़कों पर शोक जुलूस निकाला गया और लोगों ने उन्हें इस्लामी क्रांति तथा प्रतिरोध की राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बताते हुए याद किया।
कोम से होते हुए पवित्र शहरों तक पहुंचा जनाज़ा
तेहरान के बाद पार्थिव शरीर को ईरान के धार्मिक शहर कोम ले जाया गया, जहाँ बड़ी संख्या में धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद जनाज़े को इराक के पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला ले जाया गया। दोनों शहर शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं और वहाँ भी लाखों लोगों ने अंतिम विदाई दी।
नजफ़ में लोगों ने हज़रत अली की यादों से जुड़े इस शहर में ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि कर्बला में इमाम हुसैन की कुर्बानी और प्रतिरोध की परंपरा को याद करते हुए बड़ी संख्या में लोग शोक जुलूस में शामिल हुए।
पैतृक शहर मशहद में उमड़ा जनसैलाब
इराक से लौटने के बाद आयतुल्लाह ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद के शहीद हाशमीनेजाद एयरपोर्ट लाया गया। इसके बाद उनके ताबूत को एक विशेष वाहन पर रखकर धीरे-धीरे शहर की सड़कों से होते हुए इमाम रज़ा दरगाह तक ले जाया गया।
सड़कों के दोनों ओर हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए खड़े दिखाई दिए। कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाकर और धार्मिक नारों के साथ उन्हें विदाई दी।
शोक और प्रतिरोध का प्रतीक बने लाल पोस्टर
अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने काले वस्त्र पहन रखे थे। उनके हाथों में ईरानी झंडे, आयतुल्लाह ख़ामेनेई की तस्वीरें और लाल रंग के पोस्टर दिखाई दिए। इन लाल पोस्टरों को प्रतिरोध, बलिदान और खून के बदले की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है।
इमाम रज़ा दरगाह में हुआ अंतिम संस्कार
कई दिनों तक चले शोक कार्यक्रमों के बाद मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि उनकी अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक या राजनीतिक आयोजन नहीं थी, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाला क्षण भी थी।
अमेरिका ने लगातार दो दिनों तक ईरान पर किए हमले
अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। हालांकि सपुर्द-ए-खाक किए जाने का तमाम कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ. इरान से इराक तक लाखों की भीड़ के बावजूद कहीं से कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जबकि अमेरिका ने लगातार दो दिनों तक ईरान पर हमले किए. इसके जवाब में तेहरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संचालन ईरान की शर्तों पर होगा, न कि अमेरिका की धमकियों पर। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो उसे जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
