FIFA World Cup 2026: दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच फीफा वर्ल्ड कप माना जाता है। साल 2026 के विश्व कप में 48 देशों को खेलने का मौका मिला, जिससे कई नए देशों ने पहली बार इस टूर्नामेंट में जगह बनाई। लेकिन 140 करोड़ से अधिक आबादी वाला भारत एक बार फिर इस महाकुंभ से बाहर रह गया। सवाल उठता है कि आखिर भारत आज तक फीफा वर्ल्ड कप में क्यों नहीं खेल पाया और 2026 में भी टीम क्यों क्वालिफाई नहीं कर सकी?

1950 के बाद कभी नहीं मिला प्रदर्शन के दम पर टिकट
भारत को 1950 विश्व कप में खेलने का अवसर मिला था, लेकिन टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी। इसके बाद से आज तक भारतीय फुटबॉल टीम कभी भी अपने प्रदर्शन के दम पर फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल चरण के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी। पिछले सात दशकों में भारत कई बार क्वालिफायर खेला, लेकिन हर बार एशियाई दौर में ही उसका सफर खत्म हो गया।
2026 में कहां चूक गई भारतीय टीम?
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के एशियाई क्वालिफायर में भारत को कतर, कुवैत और अफगानिस्तान के साथ ग्रुप में रखा गया था। भारतीय टीम छह मुकाबलों में केवल एक जीत दर्ज कर सकी और अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रही। अगले चरण में सिर्फ शीर्ष दो टीमों को जगह मिली, जबकि भारत बाहर हो गया। यानी विश्व कप का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
भारत के पीछे छूटने की सबसे बड़ी वजहें
भारतीय फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या जमीनी स्तर पर मजबूत फुटबॉल ढांचे की कमी है। देश में क्रिकेट की तुलना में फुटबॉल को बहुत कम संसाधन और सुविधाएं मिलती हैं। गांव और छोटे शहरों से प्रतिभाएं निकलती जरूर हैं, लेकिन उन्हें विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक कोचिंग और नियमित अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
इसके अलावा प्रशासनिक अस्थिरता, लंबे समय तक ठोस योजना का अभाव, घरेलू प्रतियोगिताओं की सीमाएं और खिलाड़ियों के विकास पर कम निवेश भी भारतीय फुटबॉल की प्रगति में बड़ी बाधा रहे हैं। यही कारण है कि जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे एशियाई देश लगातार विश्व कप खेलते रहे, जबकि भारत पीछे छूट गया।
2026 भी नहीं बदल सका भारत की किस्मत?
2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई। इससे एशिया को पहले से अधिक स्थान मिले। माना जा रहा था कि भारत के लिए यह सुनहरा अवसर होगा, लेकिन टीम शुरुआती क्वालिफाइंग चरण भी पार नहीं कर सकी। इससे साफ है कि सिर्फ विश्व कप में सीटें बढ़ जाने से सफलता नहीं मिलती, उसके लिए मैदान पर लगातार बेहतर प्रदर्शन भी जरूरी है।

1950 में कैसे मिला था मौका?
टीम इंडिया को 1950 में FIFA वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने का पहला मौका मिला। गौरतलब है कि दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में फुटबॉल वर्ल्ड कप नहीं हो पाया था। 12 साल के लंबे इंतज़ार के बाद, 1950 में ब्राज़ील ने FIFA वर्ल्ड कप की मेज़बानी की। क्वालिफ़ाइंग राउंड में हिस्सा लेने के लिए 33 देश सहमत हुए। भारत को बर्मा (म्यांमार) और फिलीपींस के साथ क्वालिफ़ाइंग ग्रुप 10 में रखा गया था। हालाँकि, बर्मा और फिलीपींस दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया, जिससे भारत अकेली टीम बची; नतीजतन, भारत टूर्नामेंट के लिए अपने-आप क्वालिफ़ाई हो गया।
भविष्य की राह क्या है?
भारतीय फुटबॉल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब विश्व कप का सपना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है जो लगातार अच्छे खिलाड़ी पैदा कर सके। यदि ग्रासरूट फुटबॉल, युवा अकादमियों, कोचिंग, घरेलू लीग और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर पर गंभीरता से काम किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत भी विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकता है। फिलहाल, करोड़ों भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों को उस दिन का इंतजार है, जब तिरंगा पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के मैदान पर खेलते हुए दिखाई देगा।
