तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में लाखों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। शोक सभा में ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ-साथ दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहे। लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में एक शख्स की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी ईरान के नए सुप्रीम लीडर और अली खामेनेई के उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई। राज्य टीवी के प्रसारण में अली खामेनेई के तीन बेटे—मुस्तफा, मेयसाम और मसूद खामेनेई—अपने पिता के ताबूत के पीछे खड़े दिखाई दिए। लेकिन मुजतबा खामेनेई कहीं भी सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए।
आखिर क्यों नहीं पहुंचे मुजतबा खामेनेई?
ईरानी अधिकारियों की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का अंतिम संस्कार में शामिल न होना एक रणनीतिक सुरक्षा फैसला था। बताया गया कि इज़राइल और अन्य दुश्मन तत्वों से संभावित हमले या हत्या की आशंका को देखते हुए उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रखा गया।
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मुजतबा खामेनेई अभी भी उस हमले में लगी गंभीर चोटों से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, जिसमें उनके पिता अली खामेनेई की मौत हुई थी। ईरान ने आधिकारिक रूप से उनकी स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत ब्योरा भी जारी नहीं किया है।
सुरक्षा एजेंसियां क्यों हैं सतर्क?
विश्लेषकों का मानना है कि मुजतबा खामेनेई इस समय ईरान के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील व्यक्तियों में से एक हैं। ऐसे में लाखों लोगों की मौजूदगी वाले सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति किसी भी सुरक्षा जोखिम को बढ़ा सकती थी। यही कारण है कि ईरानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने उन्हें सार्वजनिक मंच से दूर रखने का निर्णय लिया। ईरान के धार्मिक रिसर्च स्कॉलर नजर अब्बास रिजवी ने भारत प्लस 24 से बातचीत में बताया कि नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से जनाजे में शामिल नहीं हो सकें.
फिर भी नेतृत्व पर नहीं उठे सवाल
मोजतबा खामेनेई भले ही अंतिम संस्कार में दिखाई नहीं दिए, लेकिन ईरानी सरकार का कहना है कि वे देश के सर्वोच्च नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति को नेतृत्व संकट के बजाय सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कदम बताया जा रहा है।
दुनिया की नजर ईरान पर
अली खामेनेई की अंतिम विदाई केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक शक्ति और राष्ट्रीय एकजुटता का प्रदर्शन भी मानी जा रही है। लाखों शोकाकुल लोगों की मौजूदगी और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी ने इस समारोह को वैश्विक महत्व का आयोजन बना दिया। वहीं, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी ने दुनिया भर के मीडिया और रणनीतिक विशेषज्ञों के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
