तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए रविवार को राजधानी तेहरान का ऐतिहासिक इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला शोक और श्रद्धा का केंद्र बन गया। लाखों लोग अपने नेता को आखिरी सलाम करने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। काले कपड़ों में महिलाएं, हाथों में ईरानी झंडे लिए युवा, बुजुर्ग और बच्चे, हर तरफ गम और भावनाओं का माहौल दिखाई दिया।

तीन बेटे जनाजे में पहुंचे
इस दौरान अली खामेनेई के तीन बेटे—मुस्तफा खामेनेई, मेयसाम खामेनेई और मसूद खामेनेई अपने पिता के ताबूत के पीछे खड़े होकर अंतिम नमाज़-ए-जनाज़ा में शामिल हुए। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने इन तीनों की तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बने।

हालांकि, सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि अली खामेनेई के उत्तराधिकारी और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इस सार्वजनिक समारोह में दिखाई नहीं दिए। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों और संभावित खतरों को देखते हुए उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रखा गया।


कैसा था तेहरान का मंजर?

तेहरान की सड़कों पर जहां तक नजर जाती थी, वहां सिर्फ लोगों का हुजूम दिखाई दे रहा था। हजारों नहीं, बल्कि लाखों लोग अपने नेता की अंतिम झलक पाने के लिए घंटों से खड़े थे। इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला के भीतर और बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी थीं। कई लोग रोते हुए दुआएं पढ़ रहे थे, जबकि कई श्रद्धांजलि स्वरूप ईरानी झंडे और अली खामेनेई की तस्वीरें लिए हुए थे। जनाज़े के दौरान धार्मिक विद्वानों ने नमाज़ अदा कराई और पूरे परिसर में शोक का माहौल छाया रहा। ईरान के राष्ट्रपति, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, धार्मिक नेता और कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी इस समारोह में मौजूद रहे।

तीन बेटों ने निभाई पारिवारिक जिम्मेदारी
मुस्तफा, मेयसाम और मसूद खामेनेई पूरे समारोह के दौरान अपने पिता के ताबूत के साथ खड़े रहे। उनकी मौजूदगी को ईरानी परिवार और नेतृत्व की एकजुटता के प्रतीक के रूप में देखा गया। तीनों ने शांत भाव से अंतिम रस्मों में हिस्सा लिया और लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

मोजतबा की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
जहां तीनों भाई सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, वहीं नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के न आने से कई सवाल उठे। हालांकि, अब तक ईरानी प्रशासन ने इसे केवल सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा फैसला बताया है। इस बीच, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं, लेकिन उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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