तेहरान: अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की अंतिम विदाई को लेकर तीन दिनों तक तेहरान का ग्रैंड मोसल्ला शोक, श्रद्धांजलि और वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना रहा। लाखों लोगों की मौजूदगी ने इसे आधुनिक दौर के सबसे बड़े राजकीय अंतिम विदाई समारोहों में शामिल कर दिया।

ईरान की राजधानी तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद पूरी दुनिया की निगाहों का केंद्र बन गया। यहां पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, जहां लाखों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। चारों ओर मातम, दुआएं, नारे और भावुक माहौल देखने को मिला। समारोह में ईरान के राष्ट्रपति, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, धार्मिक नेता और सरकार के शीर्ष पदाधिकारी लगातार मौजूद रहे।

100 से अधिक देशों की मौजूदगी
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को इस राजकीय अंतिम संस्कार में आमंत्रित किया गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति, जॉर्जिया के राष्ट्रपति, तुर्किये के उपराष्ट्रपति, रूस, चीन, अफगानिस्तान, बांग्लादेश सहित कई देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने तेहरान पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल समारोह में शामिल हुआ।

श्रद्धांजलि के साथ शक्ति प्रदर्शन भी
ग्रैंड मोसल्ला में आयोजित कार्यक्रम केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा। इसे ईरान ने राष्ट्रीय एकता और वैश्विक संदेश के मंच के रूप में भी पेश किया। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने ईरान के समर्थन और प्रतिरोध के नारे लगाए। सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रही और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।

क़ुरआन की आयतों ने खींचा ध्यान
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ख़ामेनेई की अंतिम विदाई में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य-पूर्व सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद अध्यक्ष, मंत्री और विशेष दूत तेहरान पहुंचे।

कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के ग्रैंड मुसल्ला पहुंचने पर आयोजकों ने हर प्रतिनिधिमंडल के लिए अलग-अलग क़ुरआन की आयतों का पाठ किया, जिन्हें कई पर्यवेक्षकों और ईरानी मीडिया ने प्रतीकात्मक कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा। हालांकि, ईरानी आयोजकों ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि अलग-अलग आयतें किस उद्देश्य से चुनी गई थीं।

ईरान के अधिकारियों के अनुसार, इस राजकीय अंतिम विदाई समारोह में एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका सहित तीसरी दुनिया (Global South) के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला में पहुंचे विदेशी मेहमानों के स्वागत और श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष आयोजन किया गया।

समारोह के दौरान विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के लिए क़ुरआन की आयतों का पाठ किया गया। ईरानी धार्मिक विद्वानों ने इन आयतों को सब्र, इंसाफ, एकता, मानवता और अत्याचार के खिलाफ डटे रहने के संदेश से जोड़ा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि इन आयतों के माध्यम से ईरान ने दुनिया के विभिन्न देशों को शांति, न्याय और आपसी सहयोग का संदेश देने की कोशिश की।

अब आगे क्या?
तेहरान में तीन दिनों तक अंतिम दर्शन के बाद अंतिम संस्कार की अगली रस्में ईरान और इराक के अन्य धार्मिक शहरों और अंततः मशहद में पूरी की जाएंगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और धार्मिक एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन भी बन गया है।

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