बिहार,आरा, 4 अगस्त: (ब्यूरो चीफ)हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मंगलवार को आरा शहर में चेहलुम का मातमी जुलूस पूरी श्रद्धा, सम्मान और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर कर्बला के शहीदों को याद किया और इंसानियत, सच्चाई एवं न्याय के संदेश को दोहराया।

कर्बला के शहीदों की याद में मनाया गया चेहल्लुम

चेहलुम आशूरा (10 मुहर्रम) के 40 दिन बाद मनाया जाता है। इस मौके पर पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.) के नवासे हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और कर्बला में उनके साथ शहीद हुए 72 साथियों की कुर्बानी को याद किया जाता है।कर्बला की घटना इतिहास में सत्य, धैर्य और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की एक बड़ी मिसाल मानी जाती है। इसी शहादत की याद में दुनिया भर में चेहलुम के मौके पर मजलिस, नौहा और मातम का आयोजन किया जाता है।

200 साल पुरानी परंपरा के तहत निकला जुलूस

आरा शहर में चेहलुम का यह जुलूस लगभग 200 वर्षों से निकलने की परंपरा चली आ रही है। मंगलवार को यह मातमी जुलूस दोपहर करीब 3 बजे अब्बास मार्केट, गोपाली चौक के निकट स्थित इमामबाड़ा से शुरू हुआ।जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए धर्मन चौक, डीन्स टैंक, टाउन थाना, पुरानी पुलिस लाइन होते हुए छोटी कर्बला और फिर मौला बाग पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ।

नौहा और मातम के जरिए दी गई श्रद्धांजलि

जुलूस के दौरान शिया समुदाय के लोगों ने काले वस्त्र पहनकर कर्बला के शहीदों को याद किया। लोगों ने नौहा पढ़े और मातम कर हज़रत इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की कुर्बानी को श्रद्धापूर्वक याद किया।इस दौरान माहौल गमगीन और भावनात्मक रहा। लोगों ने कर्बला के संदेश को याद करते हुए आपसी भाईचारे और इंसानी मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया।

नौहाख्वानों ने पेश की भावपूर्ण प्रस्तुति

जुलूस में सैयद अली हुसैन, सैयद वारिस बिलग्रामी, सैयद रियाज हुसैन और सैयद नासिर हुसैन ने नौहा पढ़ा।सैयद रियाज हुसैन द्वारा पढ़े गए नौहे की पंक्तियों ने लोगों को भावुक कर दिया—

“चेहल्लुम करो हुसैन का, आओ हुसैनियों”

“मिट्टी अज़ीज़ करती है एक ख़स्ता तन को आज”

“तुर्बत नसीब होती है एक बेकफ़न को आज”

सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

चेहलुम के इस जुलूस में सभी समुदायों के लोगों ने शामिल होकर सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। स्थानीय लोगों ने जुलूस की व्यवस्था में सहयोग किया और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजन को सफल बनाया।आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवता, त्याग और सच्चाई के रास्ते पर चलने का संदेश भी देता है।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

जुलूस में सैयद वारिस हुसैन, सैयद शब्बीर हसन, सैयद सरफराज हैदर, सैयद यावर हुसैन, सैयद मेहदी हसन, सैयद शादाब हुसैन, सैयद राशिद हुसैन, सैयद अकील हैदर, मौलाना सादिक जफर, सैयद कमर हैदर, सैयद अंदलीब हुसैन, मोहम्मद अमानुल्ला, सैयद आदिल बिलग्रामी, सैयद समद बिलग्रामी, गुड्डू अंसारी और मुख्तार अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

सर्व-धर्म हुसैनी एकता समाज ने संभाली व्यवस्था

जुलूस के सफल संचालन में सर्व-धर्म हुसैनी एकता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था की ओर से ओम प्रकाश “मुन्ना”, मोहम्मद एकराम आलम, मोहम्मद शहजाद, अधिवक्ता अजीत रंजन, अंजनी सिन्हा, अखिलेश कुमार, वीरेंद्र श्रीवास्तव, विजय कुमार और वीर बहादुर सहित अन्य सदस्यों ने व्यवस्था में सहयोग किया।संस्था के सदस्यों ने जुलूस के दौरान आपसी समन्वय बनाए रखने और लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई।

प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।मीडिया कर्मियों ने भी जुलूस की लाइव कवरेज की, जिसकी लोगों ने सराहना की।

भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है चेहलुम

सर्व-धर्म हुसैनी एकता समाज के अध्यक्ष ओम प्रकाश “मुन्ना” और सचिव गुड्डू अंसारी ने सभी सहयोगियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों का धन्यवाद व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि चेहलुम का आयोजन हमें सत्य, धैर्य, त्याग और मानवता के मूल्यों की याद दिलाता है। इस तरह के आयोजन समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता को मजबूत करने का काम करते हैं।