नई दिल्ली: बिंद, निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप और धीमर समेत जल-आधारित एवं पारंपरिक समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों को लेकर जल्द देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। वीरांगना फूलन देवी सामाजिक न्याय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान ने इसकी घोषणा की है।
सामाजिक सम्मान और अधिकारों का मुद्दा
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि इन समुदायों के सामने लंबे समय से सामाजिक सम्मान, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और पारंपरिक आजीविका से जुड़े कई सवाल हैं। उन्होंने कहा कि अब इन समस्याओं को सिर्फ ज्ञापन और आश्वासन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
मंच की प्रमुख मांगों में बिंद, निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप और धीमर समुदायों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग पर तत्काल न्यायपूर्ण निर्णय शामिल है। इसके साथ शिक्षा, रोजगार और राजनीति में इन समुदायों की समान एवं प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
पारंपरिक रोजगार को संरक्षण देने की मांग
मंच ने जल-आधारित पारंपरिक व्यवसायों के लिए सरकारी सहायता, संरक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। मछुआरों और अन्य जल-आधारित समुदायों के लिए बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग रखी गई है
बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर
10 सूत्रीय एजेंडे में समुदाय के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, कोचिंग और तकनीकी शिक्षा की विशेष व्यवस्था की मांग शामिल है। इसके अलावा सामुदायिक छात्रावास, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी मंच ने उठाई है।
मोहम्मद अरशद खान ने इन समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए पृथक विकास बोर्ड के गठन की मांग की। साथ ही सरकारी योजनाओं में भेदभाव और उपेक्षा समाप्त कर पात्र लोगों को योजनाओं का पूरा लाभ देने की बात कही गई है।
संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर जोर
मंच ने समुदाय की संस्कृति, परंपरा और पहचान के संरक्षण की भी मांग की है। अरशद खान ने कहा कि सामाजिक एकता, भाईचारे और संविधान के मूल्यों के आधार पर न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करना आंदोलन का उद्देश्य होगा।
‘किसी समुदाय के खिलाफ नहीं होगा आंदोलन’
अरशद खान ने कहा, “यह किसी जाति या समुदाय के खिलाफ आंदोलन नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष होगा।” उन्होंने कहा कि मंच देशभर में सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और प्रभावित समुदायों को जोड़कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा।
जल्द घोषित होगी तारीख और कार्यक्रम
वीरांगना फूलन देवी सामाजिक न्याय मंच की ओर से कहा गया है कि आंदोलन के प्रथम चरण की तारीख, स्थान और कार्यक्रम की विस्तृत घोषणा जल्द की जाएगी। मंच ने आंदोलन को शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चलाने की बात कही है। मोहम्मद अरशद खान ने कहा, “सामाजिक न्याय केवल नारा नहीं, हमारा अधिकार है। अब अधिकारों के लिए निर्णायक लोकतांत्रिक संघर्ष होगा।”
