पटना: बिहार में सड़क यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने स्टेट हाईवे पर भी टोल टैक्स वसूलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल राष्ट्रीय राजमार्ग ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा विकसित उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों पर भी वाहन चालकों को टोल देना होगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था तैयार करना है।
नई व्यवस्था में किस सड़क पर कितना टोल?
प्रस्तावित नीति के अनुसार, चार लेन तथा उससे अधिक चौड़ी स्टेट हाईवे सड़कों पर निर्धारित टोल दर का 100 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। वहीं 5.5 मीटर चौड़ी मध्यवर्ती लेन वाली सड़कों पर निर्धारित टोल का 50 प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा। इससे सरकार को सड़क अवसंरचना के विकास और मरम्मत के लिए अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।
आम लोगों और ट्रांसपोर्टरों की बढ़ी चिंता
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे बड़ा असर आम यात्रियों और परिवहन क्षेत्र पर पड़ सकता है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि टोल टैक्स बढ़ने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। वहीं, जो लोग रोजाना स्टेट हाईवे से यात्रा करते हैं, उनके मासिक खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार की दलील और विशेषज्ञों की राय
सरकार का तर्क है कि टोल से मिलने वाली राशि का उपयोग बेहतर सड़क निर्माण, नियमित रखरखाव और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टोल के बदले लोगों को गड्ढामुक्त सड़कें, सुरक्षित यात्रा और कम समय में गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलती है, तो यह व्यवस्था लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि इसके लिए पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी होगी।
अब सबकी नजर अगले फैसले पर
फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि यह नई व्यवस्था कब से लागू होगी, किन-किन स्टेट हाईवे पर सबसे पहले टोल प्लाजा बनाए जाएंगे और किन श्रेणियों के वाहनों को छूट मिलेगी। आने वाले दिनों में सरकार की विस्तृत अधिसूचना इन सभी सवालों के जवाब दे सकती है। इतना तय है कि यदि यह नीति लागू होती है, तो बिहार में सड़क यात्रा की तस्वीर और यात्रियों का खर्च—दोनों बदलने वाले हैं।
